इंदौर। देश में चांदी और सोने के भाव में रिकॉर्डतोड़ वृद्धि हो रही है। बुधवार को चांदी 3 लाख 25 हजार किलो के भाव को पार कर गई। वहीं प्रति तोला सोना भी डेढ़ लाख के करीब पहुंच गया है। इन हालातों में अब बाजार में चांदी मिलना मुश्किल हो रही है। बड़े व्यवसायियों ने भी चांदी की खरीदी बिक्री से हाथ खींच लिए हैं। ग्राहक समझ नहीं पा रहे कि चांदी में इतनी ज्यादा चमक क्यों बढ़ गई है।
इंदौर सराफा मार्केट की चमक फीकी
दुनिया भर में चांदी की खरीदी में आ रही तेजी के चलते मध्य प्रदेश के सबसे बड़े इंदौर सराफा बाजार में भी चांदी 325000 के आंकड़े को पार कर गई। इंदौर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनी ने बताया “बढ़ती कीमतों के कारण कई शहरों में चांदी के व्यापार को लेकर विवाद हो रहे हैं, जो व्यापारी बड़े व्यापारियों से माल खरीद कर बेचने के लिए ले जा रहा है, बढ़ती कीमत के कारण उसे खरीदी की रकम चुकाना मुश्किल हो रहा है।”
कारीगर, ढलाई, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों की आजीविका पर असर
चांदी के बढ़ते दामों ने सराफा बाजार में ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसने 40 वर्षों का इतिहास तोड़ दिया। डेढ़ महीने के भीतर चांदी की कीमत दोगुणी होकर ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जिसकी कल्पना भी कारोबारियों ने नहीं की थी। 21 नवंबर को जहां चांदी का भाव एक लाख 52 हजार रुपये प्रति किलोग्राम था, 20 जनवरी तक तीन लाख 22 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचा। यह उछाल सराफा उद्योग के लिए झटका है। अब बाजार में न खरीदार हैं, न विक्रेता।
एक महीने से ठंडी पड़ी भट्ठियां, उम्मीद व आशंका के बीच फंसा सराफा उद्योग
हालात ऐसे हो गए हैं कि दुकानें खुली तो हैं, लेकिन लेनदेन ठप है। इसी उथल-पुथल के बीच सराफा कारोबार को बड़ा झटका उस वक्त लगा, जब चार दर्जन व्यापारियों की करीब 2500 किलो चांदी लेकर 10 कारोबारी फरार हो गए। करोड़ों की चांदी डूबने की आशंका ने छोटे और मझोले व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने सराफा कारोबार से जुड़े एक लाख मजदूरों के रोजगार पर भी संकट ला दिया है।
कारीगर, ढलाई करने वाले, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों के लेकर अन्य की आजीविका इसी पर निर्भर है। स्थिति यह है कि एक पायल बनाने में ही करीब 10 से 12 मजदूरों को रोजगार मिलता है। लेकिन जब पायल ही नहीं बनेगी, तो ये मजदूर क्या करेंगे।
चांदी न मिलने पर गिलट की पायल का काम
अर्जुनपुरा के रहने वाले कारीगर अजय बताते हैं कि चांदी की माल नहीं मिलने पर अब उन्होंने गिलट की पायल बनाने का काम शुरू किया है, लेकिन इसमें भी मजदूरी कम हो गई है। फिर भी परिवार के भरण पोषण को देखते हुए गिलट का काम ले लिया है।
मध्यम वर्ग से भी दूर हुई चांदी
सराफा कारोबारी हुकुम सोनी का कहना है “बाजार में ग्राहकों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है, क्योंकि अब मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए चांदी खरीदना भी मुश्किल हो गया है। क्योंकि सबसे छोटा चांदी का आइटम भी अब ₹2000 तक पहुंच गया है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है। गुजरात के सूरत में इन्हीं हालातों के कारण कई व्यापारियों ने चांदी का धंधा बंद कर दिया। ऐसी स्थिति अब इंदौर सराफा बाजार में आ रही है कई व्यापारियों में व्यापार के दौरान टकराव हो रहे हैं।”
शादी के सीजन में भी खरीदने की हिम्मत नहीं
शादी का सीजन होने के बाद भी लोग चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं। ग्राहक आते हैं और रेट पूछकर वापस चले जाते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है कि हो सकता है आगे चलकर चांदी के रेट कम हो जाएं। लेकिन जब वही ग्राहक फिर वापस खरीदारी करने आता है तो कम से कम वजन के आइटम्स के बारे में जानकारी लेता है। दूसरी तरफ, चांदी को गिरवी रखने वाले अब उसे उठाने के लिए आ रहे हैं। इसको लेकर भी विवाद सामने आ रहे हैं।
चांदी के भाव कम होने की उम्मीद नहीं
सोना-चांदी के जानकार बता रहे हैं कि चांदी का फंड एवं कोष विकसित करने के कारण भी दाम बढ़ रहे हैं, क्योंकि युद्ध के हालातो में चांदी और सोना निवेशकों के लिए भी सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है। चांदी उत्पादक देश पेरू में 23% चांदी का फंड है, जिसकी मात्रा 149000 टन है। इसी प्रकार चीन में 99000 टन और रूस में 70000 टन का चांदी कोष तैयार किया गया है। ऐसी स्थिति में चांदी के दाम कम होने की संभावना कम है।
