नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) ने अमेरिका की ओर से लगाए गए हाई टैरिफ के बावजूद अपना दमखम दिखाया है और आईएमएफ से लेकर वर्ल्ड बैंक तक दुनियाभर ने इसका लोहा माना है। देश दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है। भले ही डोनाल्ड ट्रंप अपने टैरिफ गेम (Trump Tariff Game) में उलझे हुए हैं और ताबड़तोड़ धमकियां दे रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर भारत लगातार खेल करता जा रहा है। बीते कुछ दिनों में ओमान से लेकर न्यूजीलैंड समेत अन्य कई ट्रेड डील करने के बाद अब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एफटीए (India-EU FTA) होने वाला है, जिसके सिग्नल खुद EU Chairman उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दिए हैं और इसे सबसे बड़ी डील करार दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा है कि दावोस के बाद वे भारत का दौरा कर सकती हैं।
‘ग्लोबल GDP का एक चौथाई हिस्सा कवर’
दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच पर बोलते हुए यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने संकेत दिया कि EU-India लंबे समय से रुके हुई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच रहे हैं। उर्सुला वॉन डेर ने इसे लेकर पॉजिटिव संकेत दिया कि ये डील दुनिया के दो सबसे बड़े बाजारों के बीच आर्थिक संबंधों को नया आकार दे सकती है।
वॉन डेर लेयेन ने कहा, ‘अभी बहुत काम करना बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की कगार पर हैं, कुछ लोग इसे अब तक की सबसे बड़ी Trade Deal कहते हैं। यह एक ऐसा समझौता होगा जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा, जो वैश्विक जीडीपी (Global GDP) का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा।’ उन्होंने इसे यूरोपीय संघ के व्यापार संबंधों में विविधता लाने और जोखिम कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया है।
भारत को मिलेगा 27 देशों का बाजार
भारत के लिए यूरोपीय यूनियन के साथ ये व्यापार समझौता इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसका संभावित दायरा बहुत व्यापक है। ब्रसेल्स के लिए, भारत उसकी चीन पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक रूप से सहयोगी माने जाने वाले देशों के साथ संबंध मजबूत करने में एक बड़े पार्टनर के रूप में उभरा है। इस डील से भारत के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों वाले बाजार तक अधिक पहुंच बनेगा और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
2007 में शुरू हुई बातचीत अंतिम पड़ाव पर
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत साल 2007 से चल रही थी और ये लगातार एक दशक तक ठप पड़ी रही। हालांकि, तमाम राजनीतिक गतिविधियों में नए सिरे से सक्रियता आने के बाद 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया था। तब से, India-EU Trade Deal को लेकर बात लगातार आगे बढ़ी है। जो महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, डिजिटल शासन और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में सहयोग पर केंद्रित है।
ट्रंप टैरिफ से दुनिया को डराने में लगे
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते साल 2025 की तरह से ही इस साल भी लगातार दुनिया को अपने टैरिफ से डराने में लगे हैं। उनके हालिया Tariff Attacks की बात करें, तो पहले उन्होंने ईरान के साथ व्यापारिक रिश्ते रखने वाले देशों पर 25% Tariff लगाने की धमकी दी, फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के अपने प्लान में रोड़ा बन रहे 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ की वॉर्निंग दे डाली, जो 1 फरवरी से लागू होने वाला है और इसे 1 जून से बढ़ाकर 25% किए जाने की बात भी कही है।
वहीं डोनाल्ड ट्रंप की सबसे ताजा धमकी की बात करें, तो उन्होंने फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ (Trump 200% Tariff Warning) लगाने की नई धमकी दे डाली है। इसके बाद से दुनियाभर के शेयर बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। जापान से लेकर कोरिया तक के शेयर मार्केट क्रैश (Stock Market Crash) नजर आ रहे हैं।
