नई दिल्ली। मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कोरियन का इस्तीफा हो गया है. भाजपा के सीनियर नेता और अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपना इस्तीफा दिया. उनके इस्तीफे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर जॉर्ज कुरियन का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफ़ा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया. इस इस्तीफे के बाद अब मोदी सरकार में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। दरअसल, जॉर्ज कुरियन ने आज यानी मंगलवार को अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री (MoS) के पद से इस्तीफा दे दिया. उनका छह साल का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया था. भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजने का फैसला किया. 65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री (MoS) के तौर पर काम कर रहे थे. वह भाजपा के कद्दावर नेता हैं और 1980 में पार्टी की शुरुआत से ही इसके सदस्य रहे हैं।
जॉर्ज कुरियन कौन हैं?
65 साल के कुरियन अगस्त 2024 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री (MoS) के तौर पर काम कर रहे थे। वह बीजेपी के एक सीनियर नेता हैं और 1980 में पार्टी के बनने के समय से ही इसके सदस्य रहे हैं। कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया था, जिसकी वजह से उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। कहा जाता है कि केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें दोबारा नॉमिनेट नहीं किया गया। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, कुरियन का जन्म 20 सितंबर, 1960 को केरल के कोट्टायम जिले की एट्टुमानूर नगरपालिका के नाम्बियाकुलम में हुआ था। उन्होंने अपने गृहनगर में स्कूली शिक्षा पूरी की और उसके बाद लॉ (कानून) में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन किया।
2024 में बने थे केंद्रीय मंत्री
उन्होंने 9 जून, 2024 को केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली और 11 जून, 2024 को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का कार्यभार संभाला। इससे पहले, कुरियन राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के तौर पर काम कर चुके थे।
जॉर्ज कुरियन के बारे में और जानें
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, जॉर्ज कुरियन का जन्म 20 सितंबर 1960 को केरल के कोट्टायम जिले की एट्टुमानूर नगर पालिका के नाम्बियाकुलम में हुआ था. उन्होंने अपने गृहनगर में स्कूली शिक्षा पूरी की और उसके बाद लॉ यानी कानून में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन किया।
केरल में ईसाई वोटर्स को बीजेपी ने दिया संदेश
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में जब केरल के सीनियर नेता जॉर्ज कुरियन को शामिल किया गया तो देश के साथ-साथ केरल के लोग भी हैरान रह गए. दरअसल ऐसी कोई चर्चा नहीं थी कुरियन को केंद्र सरकार में शामिल किया जाएगा. जॉर्ज कुरियन को सरकार में शामिल करने को लेकर चर्चा हुई कि केरल में विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने ये फैसला किया है।
केरल में करीब 17 फीसदी आबादी ईसाई है. माना जाता है कि ईसाई वोटों ने राज्य में बीजेपी का लोकसभा खाता खोलने में अहम भूमिका निभाई है, जिसमें सुरेश गोपी ने त्रिशूर सीट 74,000 से ज़्यादा वोटों से जीती. इसीलिए उन्हें मोदी सरकार में शामिल करके ईसाई वोटर्स को एक संदेश दिया गया था।
कैसा रहा जॉर्ज कुरियन का सफर?
जॉर्ज कुरियन 1980 में बीजेपी के बनने के समय ही पार्टी में शामिल हो गए थे. बीजेपी में अपने लंबे सफर के दौरान कुरियन ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष के तौर पर भी काम किया है. जब वाजपेयी सरकार में राजगोपाल रेल राज्य मंत्री थे तब वे उनके ओएसडी भी रहे।
कब से थे इस पद पर
उन्होंने 9 जून 2024 को केंद्रीय राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली और 11 जून 2024 को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का कार्यभार संभाला. इससे पहले जॉर्ज कुरियन ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष और तत्कालीन रेल राज्य मंत्री ओ. राजगोपाल के विशेष कर्तव्य अधिकारी (OSD) के तौर पर काम किया था।
इस्तीफे की क्या वजह?
इस्तीफा देनेवाले मंत्री जार्ज कुरियन के राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा था.
उन्होंने केरल में विधानसभा चुनाव भी लड़ा था लेकिन वो हार गए.
सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय नेत्रित्व उन्हें अब प्रदेश राजनीति में भेजने की तैयारी कर रहा है.
