नई दिल्ली। RPSC SI परीक्षा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने RPSC SI भर्ती मामले में अपने 2 अप्रैल के आदेश में बदलाव किया है। बेंच ने राहत सिर्फ़ याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा तक सीमित कर दी है और उन लगभग 95,400 उम्मीदवारों को इस राहत से बाहर कर दिया है जो पहले इस दायरे में आते थे। बेंच ने अपने पिछले आदेश के पैरा 5 और 6 को हटा दिया है। इन पैरा में “याचिकाकर्ता जैसे अन्य उम्मीदवारों” को परीक्षा में बैठने की अंतरिम अनुमति दी गई थी।
अब सिर्फ याचिकाकर्ता को ही मिलेगा लाभ
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिए अपने आदेश में बदलाव किया है। इस आदेश के तहत कोर्ट ने करीब 2.21 लाख उम्मीदवारों को राहत देते हुए उन्हें राजस्थान सब-इंस्पेक्टर (SI)/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2025 में अस्थायी तौर पर शामिल होने की अनुमति दी थी। पिछला आदेश सूरज मल मीणा नाम के एक उम्मीदवार की याचिका पर दिया गया था। सूरज मल मीणा ने यह कहते हुए परीक्षा को कम से कम चार हफ़्ते के लिए टालने की मांग की थी कि वह परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे।
राजस्थान लोक सेवा आयोग की याचिका पर कोर्ट ने किया आदेश में बदलाव
शुक्रवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की विशेष पीठ ने राजस्थान लोक सेवा आयोग की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पिछले आदेश में बदलाव किया। आयोग ने अपनी याचिका में कहा था कि उसके लिए परीक्षा में इतने ज़्यादा उम्मीदवारों को शामिल करना संभव नहीं है। इसके चलते, कोर्ट ने यह राहत सिर्फ़ मूल याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा तक ही सीमित रखी, और अन्य उम्मीदवारों को यह राहत नहीं दी। कोर्ट ने इसके पीछे यह तर्क दिया कि मीणा के अलावा किसी भी अन्य उम्मीदवार ने ऐसी ही राहत पाने के लिए कोर्ट का दरवाज़ा नहीं खटखटाया था। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि राजस्थान हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच द्वारा इस मामले पर फ़ैसला सुनाए जाने के बाद, बाकी उम्मीदवारों को भी कोर्ट में याचिका दायर करने की पूरी आज़ादी होगी।
